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प्राकृत सरिता

प्राकृत से परिचय

प्राकृत की धारा, हर घर तक।

हमारा उद्देश्य

प्राकृत सरिता हिन्दी-माध्यम का स्वतंत्र अध्ययन मंच है। हमारा उद्देश्य है कि प्राकृत हर घर तक पहुँचे: बच्चे खेल-खेल में सीखें और बड़े जिनवाणी को उसकी मूल भाषा में समझ सकें।

भाषा और साहित्य

प्राकृत भारतीय आर्य भाषाओं का एक समूह है। जैन आगम, नाटक और काव्य में इसकी विभिन्न परम्पराएँ मिलती हैं। शौरसेनी, महाराष्ट्री और अर्धमागधी की अपनी भाषिक विशेषताएँ हैं।

शास्त्रीय भाषा

अक्टूबर 2024 में भारत सरकार ने प्राकृत को शास्त्रीय भाषा का दर्जा दिया। इसका अध्ययन साहित्य और जिनवाणी की समझ को समृद्ध करता है।

यहाँ क्या मिलेगा

  • वर्णमाला से आगम-पाठ तक क्रमबद्ध, संवादात्मक पाठ।
  • रंग-बिरंगे व्याकरण विषय और प्रत्यय-तालिकाएँ।
  • प्राकृत, हिन्दी या रोमन में खोजने योग्य शब्दकोश, हर शब्द की आवाज़ के साथ।
  • चित्रों वाली कथा-वाटिका, खेल, वाक्य-अभ्यास और चौबीस तीर्थंकरों का परिचय।

स्वतंत्र अध्ययन मंच

प्राकृत सरिता में व्याकरण, श्रवण, शब्द-अभ्यास और वाक्य निर्माण का चरणबद्ध अध्ययन है। यह स्वतंत्र अभ्यास मंच है; किसी संस्था का अधिकृत प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम नहीं है।

रूप और परम्परा

वैकल्पिक रूपों को एक ही भाषा-परम्परा मानकर नहीं मिलाया जाता। जिन रूपों का स्रोत निर्धारित नहीं है, उनके साथ विद्वत् समीक्षा अपेक्षित होने का संकेत बना रहता है। अस्वीकरण पढ़ें

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