प्राकृत सरिता
पाठ-पाठक
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णमोकार मन्त्रप्राकृत परम्परा · पंच परमेष्ठी को नमस्कार करने वाला प्राकृत मन्त्र।अभ्यास पाठपाठ्यक्रम · सीखे गए सर्वनाम और क्रियाओं से बना सरल पाठ।🔒पाठशाला में रेवतीमूल रचना — प्राकृत सरिता · रेवती के पाठशाला वाले दिन की छोटी कहानी। सब वाक्य वर्तमान काल में हैं।🔒फूलों की दुकानमूल रचना — प्राकृत सरिता · मन्दिर के पास नंदिनी और फूल बेचने वाले हर्ष की बातचीत। कोष्ठक में बोलने वाले का नाम दिया है।🔒उद्यान में मोरमूल रचना — प्राकृत सरिता · पद्म और कमला उद्यान में नाचता मोर देखते हैं। कही गई बात के बाद आने वाले त्ति (ऐसा) पर ध्यान दीजिए।🔒खेल का मैदानमूल रचना — प्राकृत सरिता · दो मित्रों की सुबह की दौड़। सिग्घं (तेज़) और सणिअं (धीरे) जैसे छोटे शब्द पहचानिए।🔒गाँव की यात्रामूल रचना — प्राकृत सरिता · विमल की गाँव-यात्रा: पहले बीती बातें (ईअ), फिर आगे की योजना (हि)। कल्लं यहाँ बीते कल और आने वाले कल, दोनों अर्थों में आया है — क्रिया देखकर पहचानिए।🔒उत्सव की तैयारीमूल रचना — प्राकृत सरिता · सुमति और माँ उत्सव की तैयारी करती हैं। कल की खरीदारी भूत काल में है और उत्सव का दिन भविष्यत् काल में।🔒प्यासा पथिकमूल रचना — प्राकृत सरिता · नदी-तट पर एक पथिक और वसुमति की कहानी। इसमें ऊण (करके), उं (के लिए) और न्त (करती हुई) वाले कृदन्त हैं, साथ में कई विभक्तियाँ भी।🔒मंगल पाठमंगल पाठ (जैन परम्परा) · चार मंगल, चार लोकोत्तम और चार शरण — णमोकार मन्त्र के बाद पढ़ा जाने वाला प्राचीन प्राकृत पाठ।🔒खामेमि सव्वजीवेक्षमापना गाथा (प्रतिक्रमण पाठ) · सब जीवों से क्षमा माँगने और सबसे मैत्री रखने की प्रसिद्ध गाथा, जो प्रतिक्रमण और क्षमापना के समय बोली जाती है।🔒धम्मो मंगलमुक्किट्ठंदसवेयालियं (दशवैकालिक सूत्र) 1.1 · दशवैकालिक सूत्र की पहली गाथा — धर्म क्या है, और जिसका मन धर्म में लगा रहे, उसका कैसा आदर होता है।🔒विद्यार्थी की सुबहमौलिक अभ्यास पाठ · वर्तमान काल का सरल पाठ: अरुण की सुबह की दिनचर्या।🔒गाँव का मेलामौलिक अभ्यास पाठ · विभक्तियों का अभ्यास: मेले के दिन गाँव में कौन क्या करता है।🔒नदी के तट परमौलिक अभ्यास पाठ · सप्तमी और षष्ठी विभक्ति का अभ्यास: नदी किनारे का एक दृश्य।🔒गुरु के निर्देशमौलिक अभ्यास पाठ · आज्ञा का अभ्यास: कक्षा में गुरु विद्यार्थियों को निर्देश देते हैं।🔒कल का बाज़ारमौलिक अभ्यास पाठ · भूत काल का अभ्यास: कल नगर के बाज़ार में क्या हुआ।🔒सव्वे जीवादशवैकालिक 6.10 · गाथा का पहला आधा भाग: सब जीव जीना चाहते हैं, यही अहिंसा का आधार है।🔒यात्रा की योजनामौलिक अभ्यास पाठ · भविष्य काल और सम्बन्ध भूत कृदन्त का अभ्यास: कल की पहाड़ यात्रा।🔒समयं गोयम मा पमायएउत्तराध्ययन 10.1 · महावीर का गौतम को उपदेश: जीवन पके पत्ते जैसा है, क्षण भर भी प्रमाद मत करो।🔒आत्मा पर विजयउत्तराध्ययन 9.34 · उत्तराध्ययन के नौवें अध्ययन की गाथा: युद्ध में लाखों को जीतने से बड़ी विजय अपने आप को जीतना है।🔒